Post Views: 799 डा. शंकर सुवन सिंह योग एक आध्यात्मिक प्रक्रिया हैं। योग शरीर, मन और आत्माको एक सूत्रमें बांधती है। योग जीवन जीनेकी कला है। योग दर्शन है। योग स्वके साथ अनुभूति है। योगसे स्वाभिमान और स्वतंत्रताका बोध होता है। योग मनुष्य एवं प्रकृतिके बीच सेतुका कार्य करती है। योग मानव जीवनमें परिपूर्ण सामंजस्यका […]
Post Views: 994 भारत-चीन सम्बन्धोंके सन्दर्भमें चीनी विदेशमंत्री वांग यी का ताजा बयान कुछ अलग ही है, जिसमें भारतके प्रति उनके सुर भी बदल गये हैं। इसपर सहज विश्वास करना तो कठिन है लेकिन इसके निहितार्थको भी समझना जरूरी है। भारत और चीनके बीच पूर्वी लद्दाख प्रकरणमें आयी कटुता अभी समाप्त नहीं हुई है। सीमापर […]
Post Views: 1,030 हृदयनारायण दीक्षित प्रकृति सदासे है। परिवर्तनशील है। अखंड सौभाग्यवती भी है। प्रकृतिका एक-एक अंश गतिशील है। प्रकृतिके अणु और परमाणु न केवल गतिशील है, बल्कि नाच रहे हैं। ऋग्वेदमें सृष्टिके उद्भवका सुंदर उल्लेख है। चौमासाके चार माह व्रत उपासनाका सुंदर अवसर है। विद्वानोंने १२ महीनोंमेंसे चार महीनेका दायित्व, कर्तव्य और आनन्दको एक […]