पटना

बिहारशरीफ: कृषि को उद्योग का दर्जा देने की मांग को लेकर प्रगतिशील मगही समाज ने निकाली रैली


बिहारशरीफ (आससे)। प्रगतिशील मगही समाज द्वारा शनिवार को कृषि को उद्योग का दर्जा देने की मांग को लेकर शहर में एक रैली निकाली गई जो शहर के विभिन्न मुख्य मार्गों से होकर गुजरा और बाद में एक सभा में तब्दील हो गई। रैली का नेतृत्व मगही समाज के जिला सचिव दिलीप कुमार ने किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि खेती, किसानी में देश की शत-प्रतिशत आबादी को भरण-पोषण और 80 फीसदी आबादी को रोजगार देने की ताकत है।

लेकिन यह तब होगा जब कृषि उत्पाद को कच्चे रूप से बाहर जाने से रोक कर उसपर सभी उद्योग स्थानीय कृषकों एवं ग्रामीणों के द्वारा सहभागिता के आधार पर संचालन का कानूनी अधिकार दिया जायेगा। इससे पूंजीवादी व्यवस्था का अंत हो जायेगा, जो आज की सरकार एवं अन्य कोई भी राजनीतिक दल नहीं चाहता। इसलिए आम जनता को हीं आर्थिक संस्कृति मुद्दे पर एकजुट होकर इस मांग को लेकर सड़क पर उतरना होगा।

मगही समाज के महासचिव रवि कुमार ने कहा कि राजनीति में अच्छा और सेवाभावी लोगों को आने का अवसर मिले इसे लिए जनप्रतिनिधिायों को मिलने वाले वेतन, पेंशन और कार्यपालिका में हस्तक्षेप को बंद करना होगा। वक्ताओं ने कहा कि मगही के चलते भारत सोना की चिड़िया बना था। आज भी भारत के शोषित एवं अभावग्रस्त लोग मगध की ओर देख रहे है। इसलिए हम मगध के लोगों को अपनी भाषा, संस्कृति और इतिहास को याद कर जाति, मजहब की संकीर्ण दीवार को तोड़कर एकजुटता की ताकत से मदद का नवनिर्माण करना होगा।

वक्ताओं ने यह भी कहा कि देश के 12 करोड़ किसान और 14 करोड़ कृषि श्रमिक के खून पसीने से देश के लोगों का जीवन चल रहा है। यही वर्ग अन्नदाता है, जीवनदाता है और देश को चलाने के लिए सरकार के खजाने में सबसे ज्यादा पैसा जमा करता है। कृषि उत्पादन के कच्चे माल से देश में पूंजीपति लोग तकरीबन 65 प्रतिशत उद्योग चलाकर और करोड़ों श्रमिकों का शोषण कर मालामाल बनते है।

वक्ताओं ने मांग किया कि कृषि को पूर्ण उद्योग का दर्जा दिलाया जाय। साथ हीं साथ कृषि उत्पाद को कच्चे रूप से बाहर जाने से रोककर उसका भंडारण किया जाय। इस अवसर पर देवेंद्र कुमार, विजय कुमार, रामशरण, अशोक ठाकुर आदि शामिल थे।