सम्पादकीय

सुरक्षाबलोंकी सफलता


जम्मू-कश्मीरमें सक्रिय आतंकियोंके खिलाफ सुरक्षाबलोंके अभियानके दौरान बड़ी सफलता मिली है। सुरक्षाबलोंके साथ मुठभेड़में हिजबुल मुजाहिदीनके शीर्ष कमाण्डर सहित चार आतंकी मारे गये हैं। इनमें १२ लाख रुपयेका इनामी आतंकी मेहराजुद्दीन हलवाई भी शामिल है, जिसे अत्याधुनिक संचार उपकरणोंके इस्तेमालमें विशेष दक्षता प्राप्त थी। वह विगत दस वर्षोंसे सक्रिय था और अनेक निर्दोष लोगोंकी हत्या की थी। उसने मुखबिरीके सन्देहमें हुर्रियत समर्थकों और पूर्व आतंकियोंको भी मौतके घाट उतार दिया था। मेहराजुद्दीनके मारे जानेसे लश्कर-ए-तैयबाकी कमर टूट गयी है। वह लश्करके पाकिस्तानी कमाण्डर अबू कासिमका करीबी था। कासिमने ही २०१५ में ऊधमपुरमें सीमा सुरक्षाबलके काफिलेपर आत्मघाती हमला कराया था। मेहराजुद्दीनको मौतके घाट उतारना सुरक्षाबलोंकी बड़ी सफलता मानी जा रही है। वस्तुत: कश्मीरमें पिछले कुछ महीनोंसे आतंकियोंकी सक्रियता बढ़ी है। हाईब्रिड आतंकियोंकी सक्रियता राज्यकी सुरक्षा व्यवस्थाके लिए बड़ी चुनौती है। इन आतंकियोंने ड्रोनका हमलेमें इस्तेमाल करना प्रारम्भ कर दिया है, जो सुरक्षाबलोंके लिए गम्भीर चिन्ताका विषय है। ऐसे हमलोंसे निबटनेके लिए सुरक्षाबलोंने नयी तकनीक विकसित कर ली है, जिससे कि ऐसे हमलोंका मुंहतोड़ जवाब दिया जा सके। कश्मीरमें आतंकियोंकी कमर तो टूट गयी है। उनके नेटवर्कको भी तबाह किया गया है। इस वर्ष अबतक ७१ आतंकियोंको मारा जा चुका है लेकिन इनकी मौजूदगी अभी बढ़ी हुई है। जम्मू-कश्मीरमें परिसीमनकी प्रक्रिया तेज होनेसे राज्यमें चुनाव कराये जानेकी सम्भावनाएं बढ़ गयी हैं। इससे आतंकियोंमें हताशाकी भावना विकसित हुई है। कुछ राजनीतिक दलोंसे इन सक्रिय आतंकियोंको समर्थन भी मिल रहा है। पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्तीके बयानोंसे आतंकियोंका मनोबल बढ़ा है। महबूबा मुफ्तीने परिसीमनका विरोध कर अपनी विकृत मानसिकताका परिचय दिया है। यह भी सत्य है कि जबसे अनुच्छेद ३७० हटा है तबसे जम्मू-कश्मीर और लद्दाखमें हालात काफी बदले हैं। विकासकी गतिविधियां बढ़ी हैं और आमजनको केन्द्र सरकारकी योजनाओंका लाभ भी मिल रहा है। सरकारी विभागोंमें बड़े पैमानेपर भर्तीका अभियान शुरू किया गया है, जिसमें स्थानीय लोगोंको रोजगारके अवसर मिलेंगे। इसके बावजूद कुछ गुमराह लोगोंकी हरकतोंसे कानून-व्यवस्थाके समक्ष समस्याएं उत्पन्न हुई हैं। आतंकियोंकी सक्रियता भी इसीका हिस्सा है। ऐसे आतंकियोंका समूल सफाया जरूरी है।

मनमानीपर बैंक दण्डित

भारतीय रिजर्व बैंकका नियमोंकी अनदेखीपर देशके १४ बड़े बैंकोंपर करोड़ों रुपयेका जुर्माना लगाना बैंकोंकी मनमानीपर अंकुश लगानेकी दिशामें सख्त और सामयिक कदम है। जिन बैंकोंपर जुर्माना लगाया गया है उनमें भारतीय स्टेट बैंक, बैंक आफ बड़ौदा, सेण्ट्रल बैंक आफ इंडिया, पंजाब एण्ड सिंध बैंक, जम्मू-कश्मीर बैंक और बन्धन बैंक सहित १४ निजी और सरकारी बड़े बैंक शामिल हैं। बैंक आफ बड़ौदापर सर्वाधिक दो करोड़ रुपये, जबकि एसबीआईपर ५० लाख रुपयेका जुर्माना लगाया गया है। आरबीआईने पहली बार इतनी संख्यामें बैंकोंपर एक साथ इतना बड़ा जुर्माना लगाया है। रिजर्व बैंक आफ इण्डियाने जो नियम-कानून बनाये हैं उसका सही ढंगसे पालन नहीं किया जा रहा है जिससे वित्तीय घोटाले भी होते हैं। इसपर रोक लगानेके लिए कड़े कदम उठाना समयकी मांग है। आरबीआईने जुर्मानेके कारणोंको रेखांकित करते हुए कहा कि इन बैंकोंकी ओरसे गैर-बैंकिंग वित्तीय कम्पनियों (एनबीएफसी) को दिये गये कर्जमें नियमोंका पालन नहीं किया गया जिसके कारण इन बैंकोंपर जुर्माना लगाया गया है। हालांकि कोरोना महामारीके दबावके बावजूद बीते वित्त वर्षमें भारतीय बैंकोंका प्रदर्शन शानदार रहा है लेकिन महामारीकी दूसरी लहरसे लोगोंकी आमदनी और रोजगारपर गहरा  असर पड़ा है। उनकी कर्ज चुकानेकी क्षमता प्रभावित हुई है। सरकार और आरबीआईके राहत पैकेजसे तात्कालिक काफी मदद मिली है जिससे चालू वित्त वर्षके दौरान एनपीएको काबूमें रखा जा सकेगा। दूसरी ओर आरबीआईका खुदरा और थोक व्यापारको सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उपक्रमोंकी श्रेणीमें लानेके बारेमें अधिसूचना जारी करना राहत देनेवाली है। इससे खुदरा और थोक व्यापारको प्राथमिकता क्षेत्र ऋणका लाभ मिल सकेगा। देशकी अर्थव्यवस्था पटरीपर लानेके लिए सरकार और आरबीआईने कई सार्थक कदम उठाये हैं लेकिन बैंकोंकी मनमानी रास्तेका रोड़ा बनी हुई है। इन बैंकोंपर दण्डात्मक काररवाई उचित है। इनसे पूरे पैसोंकी वसूली होनी चाहिए। दूसरे बैंकोंको भी इससे सीख लेनेकी जरूरत है।