सम्पादकीय

आत्मसंयमसे महामारीपर नियंत्रण


आशीष वशिष्ठï

यह सच है कि कोरोनाकी दूसरी लहरका कहर थमता दिख रहा है। कोरोनाके नये मरीजोंका आंकड़ा लगातार नीचेकी ओर जा रहा है। वहीं टीकाकरण भी युद्ध स्तरपर जारी है। लेकिन तस्वीरका दूसरा पहलू यह है कि प्रतिबंधोंसे आजादी मिलते ही सार्वजनिक स्थलोंसे लेकर आम जीवनमें संयम और सर्तकता बिल्कुल गायब हो गयी है। बाजारोंमें भारी भीड़ है। कोविड प्रोटोकालकी धज्जियां सरेआम उड़ायी जा रही हैं। यह हालात तब हैं जब अप्रैल और मईमें देशने कोरोना वायरसका घातक प्रभाव झेला है। बाजारोंमें भारी भीड़ और कोविड प्रोटोकालके अनदेखीपर दिल्ली हाईकोर्टने भी प्रदेश सरकारको सख्ती बरतनेके निर्देश दिये हैं। वहीं पिछले दिनों प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदीने भी देशवासियोंको आगाह किया है कि कोरोनाका असर कम हुआ है, लेकिन वायरस अभी खत्म नहीं हुआ है। दिल्ली हाईकोर्ट और प्रधान मंत्रीकी चेतावनीके अलावा एम्स दिल्लीके निदेशक डा. रणदीप गुलेरियाने भी आगाह किया है कि जो हालात दूसरी लहरके बाद दिख रहे हैं, उनके चलते अगले छहसे आठ हफ्तोंमें तीसरी लहरकी संभावना बन रही है।

नेशनल सेंटर फॉर बायोलॉजिकल साइंसेजके पूर्व निदेशक रहे और मौजूदा केंद्र सरकारके प्रमुख वैज्ञानिक सलाहकार डा. कृष्णास्वामी विजय राघवनने ५ मईको आशंका व्यक्त की कि भारतमें भी कोरोनाकी तीसरी लहर आ सकती है और इसे टाला नहीं जा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ पूर्वमें तीसरी लहरकी संभावना जता चुके हैं और यह भी बता चुके हैं कि तीसरी लहरका ज्यादा असर छोटे बच्चोंपर होगा। बावजूद इसके हमारे सार्वजनिक व्यवहार और जीवनमें संयमका तत्व शून्य स्तरपर दिखाई दे रहा है। प्रतिबंधोंसे छूट मिलते ही बाजारों, सार्वजनिक स्थलोंपर भारी भीड़के दृश्य आम हैं। चाहे बात दिल्लीकी की जाय या फिर लखनऊ की। देशके अन्य राज्योंसे भी ऐसी खबरें सामने आ रही हैं। कोरोना प्रोटोकाल तो दूरकी बात है, अब तो मास्क लगानेमें लोग परहेज करने लगे हैं। बिना मास्क पहने लोगोंकी बड़ी संख्या आपको सड़कोंं और बाजारोंमें दिख जायगी। लॉकडाउनसे कफ्र्यूतक भी इसी तरह बाजार खुले थे, लेकिन जहां शर्तोंके कदम डगमगाये वहां कोरोनाके हालात लौट आये। कोरोनाकी पहली लहरसे कहीं अधिक वीभत्स दूसरी लहर रही है। हमारे सामनेसे गुजरी यह लहर केवल एक कफ्र्यूकी दीवार खड़ी नहीं कर गयी, बल्कि हर गांवकी दहलीजपर आकर उसने मौत के घातक फरमान लिखे हैं। यानी पहलेसे घातक होते मंजरकी वजह हम और हमारी लापरवाही रही, अत: अबकी छूटको सब्रसे पचानेकी जरूरत अधिक है। लोग कमसे कम परिजनोंकी चिंता तो करें। बिना आवश्यक घरसे न निकलनेमें ही भलायी है। यदि विश्वके परिप्रेक्ष्यमें भारतको देखें तो भारत १३५ करोड़की आबादीके साथ विश्वका दूसरा सर्वाधिक जनसंख्या, सातवां सबसे बड़ा क्षेत्रफल, और पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थावाला एक विकासशील देश है।

आबादीके लिहाजसे हेल्थकेयर सेक्टरमें डिफेंस सेक्टरके बजाय तुलनात्मक रूपसे समग्र बजटका कम हिस्सा ही खर्च किये जानेकी परम्परा रही है। लेकिन कोरोना वायरस रूपी इस अदृश्य शत्रुने मौजूदा सरकारको अपनी प्राथमिकताओंपर पुनर्विचार करनेको विवश कर दिया है। ऐसेमें जब अमेरिका, जापान, इटली, जर्मनी समेत अन्य विकसित यूरोपीय देशोंकी स्वास्थ्य सेवाएं ध्वस्त हो गयीं तो भारतकी दशा चिंताजनक होनी ही थी। ग्लोबल हेल्थ सिक्योरिटी इंडेक्स प्रकोपको रोकने, पता लगाने, रिपोर्ट करने और इसपर अमल करनेकी अपनी क्षमताके आधारपर देशोंकी रैंकिंग करता है। इस संस्थाने भारतको १९५ देशोंमें ५७वां स्थान दिया है। भारतकी हेल्थकेयर एक्सेसकी रैंकिंग १४९ रही और इन्फ्रास्ट्रक्चर पर्याप्तता १२४वें स्थानपर। यह रैंकिंग महामारीके शुरू होनेसे थोड़ा पहले आयी थी।

पिछले साल महामारीकी पहली लहर और इस साल शुरू हुई इसकी दूसरी लहरने इस सचको जाहिर कर दिया है कि देशकी सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली नाकाम और नाकाफी है। कनाडा और यूरोपीय देशोंमें कोरोनाके तीसरी लहरके प्रभावको देखते हुए विशेषज्ञोंने अनुमान जताया है कि भारतमें इसका प्रभाव सितंबर माहतक देखनेको मिल सकता है। डबल म्यूटेंटवाले कोरोना वायरसके दूसरी लहरने न केवल भारत अपितु पूरे विश्वमें खासी तबाही मचाई हुई है। ऐसेमें तीसरी लहरकी आहटने समूचे विश्वके शीर्ष स्वास्थ्य संघटनों, सरकारों, प्रशासनिक अमलेके साथ ही आम जनमानसको भी गम्भीर चिंतामें डाल दिया है। पहली लहर सर्वाधिक बुजुर्गोंके लिए घातक रही, दूसरी लहर युवाओंके लिए और तीसरी लहर बच्चोंके लिए सर्वाधिक घातक है। पहली  लहरसे सकुशल पार रहेे भारतको टीकाकरणसे राहतकी उम्मीद थी, लेकिन जबतक वैक्सीनेशन होता तबतक दूसरी लहरने पूरे देशको झकझोर दिया। कुप्रबंधन, असफल प्रशासन, नौकरशाहीका हावी होना, अस्पतालों और चिकित्सा व्यवस्थाका लडख़ड़ाता ढांचा, गांवोंमें बदइंतजामीने सरकारी दावोंकी पोल खोल कर रख दी है।

ऐसेमें सवाल उठता है कि भारत तीसरी लहरके लिए कितना तैयार है? देशमें अबतक २७ करोड़ ६६ लाख ९३ हजार ५७२ लोगोंका टीकाकरण किया जा चुका है। जबतक पूर्ण वैक्सीनेशनके लक्ष्य हासिल नहीं होते, हर गतिविधिपर संयमकी चाबुक लटकी रहनी चाहिए। यदि हम चाहते हैं कि कोरोना वायरस तीसरी लहरका असर न दिखे तो यह इस बातपर निर्भर करता है कि कोरोना संकटसे निबटनेके लिए राज्य स्तरपर, जिलोंमें और स्थानीय स्तरपर गाइडलाइंसका किस तरहसे पालन किया जाता है। यदि टेस्टिंग, ट्रीटींग और कंटेनिंगके नियमोंको फॉलो किया जाता है तो तीसरी लहरके असरको रोका जा सकता है। एक बात गांठ बांध लीजिए कोरोनापर प्रभावी तौरपर नियंत्रण पानेके लिए आत्मसंयम सबसे आवश्यक बिंदु है। आखिर लॉकडाउन और कफ्र्यू लगानेकी आवश्यकता क्यों पड़ी। यदि हम अब भी नहीं चेते तो कइयोंकी जान जायेगी। कोरोना महामारीकी शुरू होनेकी तारीख तो हम जानते हैं लेकिन यह महामारी कब खत्म होगी यह कोई विशेषज्ञ नहीं बता सकता, इसके अलावा कोरोना वायरसके वैरिएंट्स भी आ रहे हैं, इसकी तीसरी तो क्या चौथी लहर भी आ सकती है। इसलिए हम सबकी भलाई इसीमें है कि हम संयम बरते, और कोविड प्रोटोकालका पालन करें।