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शैक्षणिक व्यवस्थाका सूत्रधार
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Post Views: 982 डा. शंकर सुवन सिंह मनुष्य सभी प्राणियोंमें सर्वश्रेष्ठ है, अन्य प्राणियोंकी मानसिक शक्तिकी अपेक्षा मनुष्यकी मानसिक शक्ति अत्यधिक विकसित है। मनुष्यके पास प्रचुर मात्रामें ज्ञान होता है। इस ज्ञानका उपयोग देशकी सेवामें लगाना चाहिए। तभी मनुष्यका जीवन सफल हो सकता है। मनुष्य कौन है। इस बातका उसे अध्ययन करना चाहिए और इस […]
चरमराती स्वास्थ्य सेवाएं
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Post Views: 609 कोरोना वायरसकी सुनामीसे देशकी स्वास्थ्य सेवाएं बुरी तरह चरमरा गयी हैं। स्वास्थ्य सेवाएं स्वयं बीमार हैं और कोरोना वायरसकी भयावहताके आगे स्वास्थ्य सुविधाएं बौनी साबित हो गयी हैं। देशके मेट्रो शहरों, महानगरोंसे लेकर छोटे और कस्बाई शहरों तथा ग्रामीण क्षेत्रोंमें स्थित सभी अस्पतालोंकी स्थिति अत्यन्त ही कमजोर है, जिनपर कोरोना वायरससे बढ़े […]
गणतंत्रपर हावी होता आरक्षण
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Post Views: 1,198 डा. शंकर सुवन सिंह आजादीके बाद देशको चलानेके लिए संविधान लिखा गया, जिसे लिखनेमें पूरे दो वर्ष ११ महीने और १८ दिन लगे। २६ जनवरी १९५० को सुबह १०.१८ मिनटपर भारतका संविधान लागू किया गया। भारतमें २६ जनवरी १९५० को सुबह १०.१८ मिनटपर भारतका संविधान लागू किया गया था और इसी उपलक्ष्यमें […]



