सम्पादकीय

गांवोंपर विशेष ध्यान

ग्रामीण क्षेत्रोंमेंकोरोना वायरसका तेजीसे फैलता संक्रमण गम्भीर चिन्ताका विषय है। यद्यपि देशमें संक्रमणकी रफ्तारमें गिरावट आयी है और नये मामलोंकी तुलनामें ठीक होनेवालोंकी संख्या भी बढ़ी है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रोंमें जिस प्रकार संक्रमण बढ़ रहा है उससे नये खतरे उत्पन्न हो गये हैं। पहली लहरमें ग्रामीण क्षेत्र अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित थे लेकिन दूसरी लहर अब […]

सम्पादकीय

महाआपदामें नि:स्वार्थ सेवा

अवधेश कुमार        कोरोना महाआपदा अकेले केवल सरकारोंके लिए चुनौतियां खड़ी नहीं की, समाजके लिए भी की है। यदि समाजका बड़ा समूह इसे समझता है तो वह अपने-अपने सामथ्र्यके अनुसार खड़ा होता है और उन चुनौतियोंको दूर करनेकी यथासंभव कोशिश करता है। एक संवेदनशील, सतर्क और सक्रिय समाजका यही लक्षण है। तमाम हाहाकार और कोहरामके बीच […]

सम्पादकीय

असममें राजनीतिज्ञोंको सीख

डा. गौरीशंकर राजहंस    हिमंता बिस्वा सरमाने असमके नये मुख्य मंत्रीके रूपसे शपथ ली। उन्हें निवर्तमान मुख्य मंत्री सर्वानन्द सोनोवालकी जगह मुख्य मंत्री बनाया गया। हिमंता बिस्वा सरमा अपनी तरहके एक अद्ïभुत राजनेता रहे हैं। उन्होंने छोटे-बड़े हर जरूरतमन्दकी अपने चलते भरपूर मदद की। उनकी छवि एक ईमानदार कर्मठ राजनेताके रूपमें उभरी है। कोई भी छोटा-बड़ा […]

सम्पादकीय

आधुनिक जीवनशैलीसे बढ़ती उच्च रक्तचापकी समस्या

 डा. प्रितम भि. गेडाम उच्च रक्तचाप अर्थात्ï हायपरटेंशन वह स्थिति है जिसमें धमनियोंमें रक्तका दबाव बढ़ जाता है, दबावकी इस वृद्धिके कारण, रक्तकी धमनियोंमें रक्तका प्रवाह बनाये रखनेके लिए हृदयको सामान्यसे अधिक काम करनेकी आवश्यकता पड़ती हैं। उच्च रक्तचापमें ब्लड प्रेशर बहुत अधिक होता है। जब आपका हृदय रक्तको बाहर निकालनेके लिए धड़कता है तब […]

सम्पादकीय

बड़ी जिम्मेदारी 

जग्गी वासुदेव यदि संयोगवश नेतृत्व कर रहे हैं और किसी योग्यता या बड़ी दूरदृष्टिकी वजहसे नहीं तो मुझे लगता है कि लोगोंके लिए आपके नेतृत्वके बिना रहना ही बेहतर होगा। एक मूर्ख व्यक्ति नेता हो, इससे ज्यादा अच्छा तो ये होगा कि लोगोंका कोई नेता ही न हो। ये थोड़ा-सा अराजक हो सकता है परन्तु […]

सम्पादकीय

राहतके संकेत

देशके लिए यह राहतकी बात है कि पिछले कई दिनोंसे कोरोनाके नये मामलोंकी संख्या तीन लाखके आस-पास है और ठीक होनेवाले मरीजोंकी संख्या नये संक्रमितोंसे अधिक है। स्वास्थ्य मंत्रालयकी ओरसे शनिवारको जारी ताजे आंकड़ोंके अनुसार पिछले २४ घण्टोंमें तीन लाख २६ हजार ९८ नये मामले सामने आये जबकि इसी अवधिमें तीन लाख ५३ हजार २९९ […]

सम्पादकीय

टीकेकी उपलब्धिमें डब्लूटीओका पेंच

डा. भरत झुनझुनवाला    कोरोनाकी महामारीसे निजात पानेके लिए इस समय देशमें प्रमुख टीका एस्ट्राजनिका द्वारा बनाया गया कोविडशील्ड प्रचलनमें है। इसे भारतकी सीरम इंस्टिट्यूट आफ इंडिया द्वारा एस्ट्राजनिकासे लाइसेंस लेकर बनाया जा रहा है। इसमें व्यवस्था है कि जिस मूल्यपर सीरम इंस्टिट्यूट इस टीकेको बेचेगी उसका आधा हिस्सा एस्ट्राजनिकाको रायल्टीके रूपमें दिया जायेगा। अत: यदि […]

सम्पादकीय

मंत्रोच्चारसे मस्तिष्कपर सकारात्मक असर

हृदयनारायण दीक्षित संसार रूपोंसे भरापूरा है। यहां प्रत्येक रूपके लिए शब्द हैं। रूपका नाम शब्दसे प्रकट होता है। प्रत्येक शब्द ध्वनि है। शब्द ध्वनि हमारे मस्तिष्कको सक्रिय करती है। मस्तिष्कमें प्रत्येक शब्दका वास्तविक रूप होता है। समुद्र वास्तविक है। अथाह जलराशि और लहरोंका यथार्थ। लेकिन समुद्र नामकरण एक शब्द मात्र है। समुद्र शब्द सुनते ही […]

सम्पादकीय

कांग्रेसकी वर्तमान दशा और दिशा

 डा. धनंजय सहाय कहते हैं वक्त सबको सिखा देता है परन्तु शायद यह बात कांग्रेसपर सटीक नहीं बैठती। एकके बाद एक चुनावोंमें मुंहकी खाने एवं सिकुड़ते जनाधारके बावजूद अंग्रेजोंके जमानेका सबसे पुराना भारतीय राजनीतिक दल मानो हम नहीं सुधरेंगेकी कसम खाकर बैठा है। अभी पिछले दिनों कांग्रेस कार्यसमितिकी बैठकमें अपने पूर्णकालिक अध्यक्षके लिए २३ जूनको […]

सम्पादकीय

सुव्यवस्था 

श्रीराम शर्मा आजके समयमें मनुष्यके बाहर-भीतर शांति तथा सुव्यवस्था स्थापित करनेके लिए आध्यात्मिक प्रयास ही सार्थक हो सकते हैं। श्रद्धा, भावना, तत्परता एवं गहराई इन्हींमें समाहित है। हर मानवका धर्म, सामान्यसे ऊपर, वह कर्तव्य है, जिसे अपना कर लौकिक, आत्मिक उत्कर्षके मार्ग प्रशस्त हो जाते हैं। धर्म अर्थात्ï जिसे धारण करनेसे व्यक्ति एवं समाजका सर्वांगीण […]