सम्पादकीय

बड़ी सफलताका दावा

आवश्यकता आविष्कारकी जननी है। यह बहुत पुरानी कहावत है लेकिन इसकी प्रासंगिकता आज भी बनी हुई है। कोरोना संकट कालमें इस वायरसको परास्त करनेके लिए पूरी दुनियाके सक्षम देशोंने नये-नये आविष्कारोंके लिए मजबूत कदम आगे बढ़ाया जिसके अनेक सार्थक परिणाम सामने आये हैं। चाहे वह टीका हो या दवाएं, इनका उपयोग कोरोनाके खिलाफ जंगमें हथियारके […]

सम्पादकीय

ब्लैक फंगससे दहशत

राजेश माहेश्वरी   म्यूकर मायकोसिस यानी ब्लैक फंगस मुख्य रूपसे उन रोगियोंको प्रभावित करता है, जिनका स्टेरॉयड और अन्य दवाओंके साथ कोरोनाका इलाज किया गया है। इसके अलावा जिन लोगोंको डायबिटीज, कैंसर जैसी दूसरी गम्भीर बीमारियां हैं, वह भी इसकी चपेटमें आ सकते हैं। इस फंगसने रोगियोंको सर्जरीके बाद अपने जबड़े और आंखें गंवानेके लिए मजबूर […]

सम्पादकीय

जैविक युद्धका शिकार भारत

शशांक द्विवेदी      आशंका जतायी जा रही है कि भारत किसी जैविक युद्धका शिकार तो नहीं हुआ है जिसने अचानक चिकित्सा तंत्रको ध्वस्त करके इतनी बड़ी तबाही मचा दी हो। कोरोना वायरस कैसे और कहांसे आया इसको लेकर कई बातें पिछले एक सालसे की जा रहीं हैं लेकिन हालमें ही इससे जुड़े कुछ चौकानेवाले तथ्य सामने […]

सम्पादकीय

भारतीय नेतृत्वका तुष्टीकरण नीति

 डा. समन्वय नंद अंतरराष्ट्रीय नर्स दिवसके एक दिन पूर्व फिलिस्तीनके आंतकी संघटन हमासकी ओरसे इसराइलपर हमला हुआ और इसमें वहां कार्य कर रही केरलकी एक नर्स सौम्या संतोषकी मौत हो गयी। इस हृदयविदारक घटनाके बाद केरलके एक कांग्रेस महिला नेता बीणा नायारने इस घटना एवं आतंकी गतिविधियोंकी निंदा कर सोशल मीडियापर एक पोस्ट किया था। […]

सम्पादकीय

ज्ञानका सम्बन्ध

ओशो उस परम सत्ताको ऋषियोंने ज्ञान कहा है। लेकिन जिस ज्ञानको हम जानते हैं, उस ज्ञानसे उसका कोई भी संबंध नहीं है। हम किसे ज्ञान कहते हैं उसे ठीकसे समझ लें तो ऋषि किसे ज्ञान कहता है उसे समझना आसान हो जायगा। पहली बात तो यह है, सदा किसी ज्ञेयका होता है, अकेला ज्ञान हमें […]

सम्पादकीय

सुधरते हालात

कोरोनाके खिलाफ जंगका असर अब विश्वके अनेक देशोंमें दिखने लगा है, जिनमें भारत भी शामिल है। स्थितियां सुधर रही हैं और लोग राहतमें भी हैं। संक्रमणकी रफ्तार कम हुई है। इससे अनेक देशोंने पाबन्दियोंमें ढील दे दी है। अमेरिकाने तो मास्ककी अनिवार्यता ही समाप्त कर दी है। बाजारोंको खोलनेका समय भी बढ़ा दिया गया है। […]

सम्पादकीय

महामारीसे मुनाफेके सौदागर

 डा. अश्विनी महाजन    आज कोरोना वायरस जिसे चीनी या वुहान वायरस भी कहा जा रहा है, ने लगभग पूरी मानवताको अपनी चपेटमें ले लिया है। इस महामारीके कारण मरनेवालोंकी भारी संख्याके कारण इस वायरससे संक्रमित लोगोंमें ही नहीं, जो लोग संक्रमित नहीं है, उनमें भी खतरा बढ़ता जा रहा है। स्वास्थ्य सुविधाएं, महामारीके सामने बौनी […]

सम्पादकीय

ग्रामीणोंकी विवशता

योगेश कुमार सोनी    कोरोनाने अब देशभरके गांवोंमें भी दस्तक दे दी है। अबतक माना जा रहा था कि गांवके लोग सुरक्षित हैं लेकिन पिछले लगभग दस दिनसे गांवोंके मौतके आंकडोंने चौका दिया। पिछले तीनमें तो शहरोंके बराबर आंकड़ा पहुंच गया। इसके अलावा परेशानी यह भी बढ़ रही है कि गांववासी झोलाछाप डाक्टरोंकी चपेटमें आ रहे […]

सम्पादकीय

संयुक्त परिवारकी शक्तिका केंद्र बिंदु महिलाएं

 डा. शंकर सुवन सिंह प्राचीन भारतीय सभ्यतामें संयुक्त परिवार हुआ करते थे। परिवारको सम्बल प्रदान करनेकी विशेषता सिर्फ संयुक्त परिवारमें हुआ करती है। परिवारकी एकता ही उसकी शक्तिकी परिचायक होती है। संयुक्त परिवार ही विषम परिस्थितियोंमें शक्तिका परिचायक हुआ करती है। कोरोनाकी दूसरी लहरने देशमें त्राहि मचा दिया। आंकड़े बताते हैं कि दूसरी लहरमें होम […]

सम्पादकीय

प्रभु सुमिरन 

बाबा हरदेव संत महापुरुष कहते हैं कि- ज्यों तिरिया पीहर बसै, ध्यान रहे पिय माहिं। तैसेई भगत जगतमें, हरिको भूलत नाहिं। सुमिरनकी सुध यों करों ज्यों सुरभी सुत माहिं। कह कबीर चारा चेरै बिसरत कबहूं नाहिं। साधसंगत! इसीलिए गुरमुख हर समय सिमरन करता है, मनसे प्रभुका आठों पहर अहसास करता है और मनसे ही झुकता […]