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विदेशी मालपर जनस्वास्थ्य स्वाहा
Posted on Author ARUN MALVIYA
Post Views: 752 डा. भरत झुनझुनवाला सन्ï १९७० में भारतमें बिकनेवाली दवाओंमें बहुराष्ट्रीय कम्पनियोंका दो-तिहाई हिस्सा था। इसके बाद सरकारने प्रोडक्ट पेटेंटको निरस्त कर दिया। पेटेंट, यानी नये अविष्कारोंको बेचनेका एकाधिकार दो तरहसे बनाये जाते हैं। प्रोडक्ट पेटेंटमें आप जिस माल (प्रोडक्ट) का आविष्कार करते हैं और उसे पेटेंट करते हैं, उस मालको कोई दूसरा […]
देशमें विदेशी बैंकोंकी दयनीय स्थिति
Posted on Author ARUN MALVIYA
Post Views: 1,157 प्रमुख अमेरिकी बैंक सिटी बैंकका भारतमें अपना कारोबार समेटनेका फैसला कुछ गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। आखिरकार क्यों विदेशी बैंकोंके भारतमें पैर उखड़ रहे हैं। इनके लिए भारत क्यों कठिन काम करनेका स्थान साबित हो रहा है कारोबार करनेके लिहाजसे। सिटी बैंकने कहा कि ग्लोबल स्ट्रैटजीके हिस्सेके रूपमें वह भारतमें अपना […]
अर्थव्यवस्था और मांगका सुचक्र
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