कोरोना कालमें महंगी तेज रफ्तारके साथ रिकार्ड स्तरपर पहुंच गयी है, जो सरकार और जनता दोनोंके लिए गम्भीर चिन्ताका विषय होनेके साथ ही देशकी अर्थव्यवस्थाके लिए भी सुखद संकेत नहीं है। केन्द्र सरकारकी ओरसे जारी आंकड़ोंके अनुसार मई माहमें थोक महंगी दर १२.९४ प्रतिशतके स्तरपर पहुंच गयी, जो २५ वर्षोंमें सर्वाधिक है। अप्रैल माहमें यह […]
Author: ARUN MALVIYA
भारत विरोधी बयानबाजी
राजेश माहेश्वरी मध्य प्रदेशके पूर्व मुख्य मंत्री दिग्विजय सिंह अधिकतर समय अपने विवादित बयानोंके लिए ही चर्चामें रहते हैं। ताजा मामलेमें दिग्गी राजाने एक पकिस्तानी पत्रकारसे कहा कि कांग्रेस सत्तामें आयी तो आर्टिकल ३७० पर पुनर्विचार करेंगे। दिग्विजय सिंहके इस बयानको पहले तो भाजपा आईटी सेलकी शरारत माना गया लेकिन बादमें इस बातकी पुष्टिï हो […]
भूमिको उपजाऊ बनानेकी चुनौती
डा. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा संयुक्त राष्ट्र संघके मरुस्थलीकरण, भूमि क्षरण और सूखेपर आयोजित वर्चुअल संवादमें १४वें सत्रमें मुख्य भाषण देते हुए नरेन्द्र मोदीने कहा कि बंजर होती भूमिके कारण दुनियाके सामने गंभीर संकट है। यह संकट भूमिके बंजर होनेतक ही सीमित नहीं हैं अपितु इससे जैव विविधता, जलवायु, खाद्यान्न संकट और सूखेकी समस्यासे जुड़ी हुई […]
कर्तव्य पालनसे सफलता निश्चित
डा. हेमेन्द्र कुमार सिंह शिक्षण वह क्रिया है जिसके द्वारा शिक्षक, छात्र तथा विषयके मध्य सम्बन्ध स्थापित होता है। शिक्षक-शिक्षण तथा शिक्षार्थीमें शिक्षक तथा शिक्षार्थी सजीव एवं सक्रिय बिन्दु है। शिक्षक शिक्षणके समय अपने कर्तव्यपथपर अधिक सक्रिय एवं सजीव रहे तब छात्र भी अपने कर्तव्यपथपर अधिक सक्रिय एवं उत्साही रहता है। जबतक शिक्षण प्रक्रियाके यह […]
ईश्वरीय शक्ति
श्रीश्री रवि शंकर हम सभीने इस धरतीपर कुछ नया और अनोखा कार्य करनेके लिए जन्म लिया है। इस अवसरको किसी भी हालमें भी न गवायें। स्वयंको कुछ बड़ा सोचने और सपने देखनेकी आजादी आपको देनी ही चाहिए। जो चीज आपको प्रिय है, वह सपने जिन्हें आप पूरा करना चाहते हैं। उनके लिए आपके पास साहस […]
चीनकी चौतरफा घेरेबंदी
कोरोना कालमें ब्रिटेनमें आयोजित विश्वके सात विकसित देशोंके संघटन जी-७ की शिखर बैठकमें चीनकी चौतरफा घेरेबंदीका एक स्वरसे निर्णय किया गया है। इसका सबसे बड़ा कारण कोरोना महामारी है, जो चीनसे ही पूरे विश्वमें फैली और इससे विश्वके प्राय: सभी देश आक्रान्त हैं। ३८ लाखसे अधिक लोगोंकी मौत हुई। शिखर बैठकमें स्पष्टï रूपसे कहा गया […]
कोरोना टीकाकरण अनिवार्य
आशीष वशिष्ठ कोरोना वायरसने ऐसा कहर ढाया है कि आनेवाले कई वर्षोंतक इस संतापको भुलाया नहीं जा सकेगा। देशमें स्वास्थ्य सेवाओंकी स्थिति किसीसे छिपी नहीं है। सरकारने हर देशवासीको मुफ्तमें कोरोनासे बचावके लिए टीकाकरणकी घोषणा की है। बावजूद इसके टीकाकरण वह गति नहीं पकड़ पा रहा है, जितनी उसे पकडऩी चाहिए थी। वास्तवमें टीकाकरणकी शुरुआतसे […]
देशको आर्थिक संबल देती खेती
प्रवीण गुगनानी सर्वविदित है कि भारतीय अर्थव्यवस्थाके साथ भारतीय जनमानस भी कृषिपर ही निर्भर रहता है। यदि कृषि सफल, सुचारू एवं सार्थक हो रही है तो भारतीय ग्राम प्रसन्न रहते हैं अन्यथा अवसादग्रस्त हो जाते हैं और यह अवसाद समूचे राष्ट्रको दुष्प्रभावित करता है। यदि भारतीय कृषिको छोटे एवं निर्धन कृषकोंकी दृष्टिसे देखें तो खरीफकी […]
बढ़ती बेरोजगारीके पीछेका सच
आर.डी. सत्येन्द्र कुमार यदि अन्तरराष्टï्रीय श्रम संघटनकी मानें तो महामारीके चलते विश्व श्रम बाजारकी हालत काफी खस्ता हुई है। इस स्थितिमें तत्काल शीघ्र सुधारके भी आसार नजर नहीं आ रहे हैं। यह सच है कि श्रम बाजारकी इस दुर्गतिके लिए केवल कोरोनाजनित महामारी ही जिम्मेदारी नहीं है। उसके लिए अन्य कई कारण भी हैं लेकिन […]
कर्म बन्धन
जग्गी वासुदेव कर्म बंधनका मतलब है कुछ किया जाना या किये जानेकी छाप, जो हमारे अंदर रहती है। आपके पिताने जो काम किये वे आपके अंदर न सिर्फ आपकी परिस्थितियोंमें काम कर रहे हैं, बल्कि आपकी हर कोशिकामें हैं। आपने देखा होगा कि जब आप १८ या २० सालके थे तो आपने अपने पिता या […]





